मध्यप्रदेश में कोविड-19 के दौरान बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के प्रयासों की सर्वोच्च न्यायालय ने की सराहना

 प्रदेश में कोविड-19 के दौरान बाल देखरेख संस्थानों में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए किए गए विशेष प्रयासों को सर्वोच्च न्यायालय ने सराहना की है। न्यायमूर्ति श्री रविंद्र भट्ट ने मध्यप्रदेश में प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा कोविड के दौरान बच्चों को परामर्श के माध्यम से मानसिक रूप से स्वस्थ रखने, प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत देखरेख योजना तैयार करने तथा उनकी रचनात्मकता में वृद्धि के प्रयासों को सराहा है। उन्होंने देश के अन्य राज्यों में भी मध्यप्रदेश के उत्कृष्ट कार्यों का अनुकरण करते हुए देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को परामर्श प्रदान करने और परामर्शदाता का पूल तैयार करने के निर्देश दिए।

 हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोविड-19 के दौरान देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के रेस्टोरेशन तथा विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चों की जमानत के विषय पर दो दिवसीय बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से की गई। मध्यप्रदेश की ओर से संचालक ,महिला बाल विकास श्रीमती स्वाति मीणा नायक ने प्रदेश में समस्त बाल देखरेख संस्थाओं में बच्चों के देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को कोविड के दौरान विशेष रूप से प्रशिक्षित परामर्शदाताओं  द्वारा गुणवत्तापूर्ण परामर्श के विषय में विस्तृत जानकारी का प्रस्तुतिकरण किया।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में समेकित बाल संरक्षण योजना के अंतर्गत संचालित बाल देखरेख संस्थाओं में बच्चों को परामर्श प्रदान करने के लिए  राज्य स्तर  से 106 मनोसामाजिक परामर्शदाताओं का पूल तैयार किया गया और सभी परामर्शदाताओं को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं स्नायु विज्ञान संस्थान (निमहासं) बेंगलुरु में तथा यूनिसेफ द्वारा विस्तृत एवं गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इन परामर्शदाताओं में से 69 परामर्शदाताओं को कॉविड के दौरान बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने तथा उनमें सकारात्मकता व रचनात्मकता के निर्माण के लिए मनोसामाजिक परामर्श के संबंध में विशेष रूप से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। विशेष रूप से प्रशिक्षित मनोसामाजिक परामर्शदाताओं द्वारा कोविड के दौरान बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर व्यक्तिगत रूप से 3921 सत्रों का आयोजन किया गया तथा बच्चों व उनके परिवारों के साथ 14029 सामूहिक परामर्श सत्रों का आयोजन किया गया, जिसके अत्यधिक सकारात्मक और उत्साहवर्धक परिणाम सामने आए हैं।

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Virendra Sharma

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