शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा- नई राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति से देश में स्‍कूली और उच्‍च शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन का मार्ग प्रशस्‍त होगा।

शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने आज कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 देश में स्कूलों और उच्च शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी। यह नीति भारत को  विश्व मंच पर ज्ञान की शक्ति के रूप में स्थापित करेगी। आकाशवाणी से विशेष भेंट में श्री निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे के लिए संभावनाओं के द्वार खोलना है, जिससे उसका समग्र विकास हो सके।

ये हां अंतिम छोर के बच्चे को पूरी विकास की संभावनाओं को देगी वहीं विविध क्षेत्रों में आगे बढ़ करके अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का ना केवल स्वाभिमान सम्मान बढ़ाएगी बल्कि जो हमारे देश के प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था की बात की हैआत्मनिर्भर भारत की बात की है इन दोनों को करने में जो नई शिक्षा नीति है वो निश्चित रूप में आधारशिला बनेगी। बहुत आमूल चूल हमने परिवर्तन हमने किए हैं। 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100 परसेंट जी आर को करेंगे। 12वीं तक हम शिक्षा का सार्वभैमिकरण का हमारा लक्ष् है। सबके लिए शिक्षा है कोई भी वंचित नहीं रहेगा।

श्री निशंक ने कहा कि कक्षा 6 के बाद से बच्चों के कौशल विकास पर ध्यान दिया जाएगा, जिससे वे 12वीं कक्षा के अंत तक कुशलता प्राप्त कर सकेंगे।

और कौशल विकास हम छठी कक्षा से शुरू करेंगे और इंटरनशिप के साथ शुरू करेंगे ताकि 12वीं तक जातेजाते बच्चा कुछ उसके हाथ में ऐसा कौशल आए कि वो अपने को अहसाए महसूस  करे। बल्कि 12वीं से निकलते ही वो अपने कदमों पर खड़ा हो सके। तो ऐसे कृत्रिम बुद्धिमता आर्टिफिश्यल एंटेलिजेंस छठी से ही शुरू कर रही है सीबीएसई। संभवतये दुनिया का पहला ऐसा देश होगा जो छठवीं से ही इसको शुरू करेगा।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि एक उच्च शिक्षा आयोग स्थापित किया जाएगा, जो शैक्षणिक संस्थाओं जैसे विश्व विद्यालय अनुदान आयोग, एन सी टी ई और ए आई सी टी ई का स्थान लेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान की भी स्थापना की जाएगी, जो देश में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन देगा। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति नया भारत सृजित करने का माध्यम बनेगी।

मध्‍यप्रदेश में भी शिक्षाविदों ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का स्वागत किया है. उनका कहना है कि यह देश के स्कूलों और उच्च शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी।

नयी शिक्षा नीति की सराहना करते हुए मध्यप्रदेशों के शिक्षाविदों ने कहा कि इससे शिक्षा के क्षेत्र में आमूल चूल परिवर्तन आएगा। डॉ हरिसिंह केंद्रीय  विश्वविद्यालय सागर के कुलपति प्रो आर पी तिवारी ने  कहा है कि  राष्ट्र को निश्चित ही एक ऐसी शिक्षा नीति की आवश्यकता थी।

इसमें तने ज्यादा सिस्टेमेटिक चेंजिज हैं। जो कि सिस्टम में परिवर्तन लाने वाले है।

वहीं अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राघवेंद्र मिश्रा ने कहा कि नई शिक्षा नीति के भविष्य में सुखद परिणाम मिलेंगे।

21वीं सदी की जो है शिक्षा संबंधी जरूरतें हैं जो हमारा सामाजिक ढांचा हैआर्थिक ढांचा हैवैज्ञानिक ढांचा है उसकी जरूरतें किस तरह से पूरी होंगी वो बहुत ही संजीदगी के साथ छुआ गया है।

देवी अहिल्या विश्वविद्यालयइंदौर में पत्रकारिता विभाग की प्रमुख डॉ सोनाली नरगुन्दे ने नई शिक्षा नीति को अच्छा कदम बताया।

नई शिक्षा नीति में जो बदलाव किए गए हैं वो बदलाव बहुत अद्भूत हैं।

शिक्षाविदों का मानना है कि नई शिक्षा नीति प्रत्येक बच्चे के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी।

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Virendra Sharma

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